Categories

 

 

Samadhi Ke Sapt Dwar

-30% Samadhi Ke Sapt Dwar
Views: 330 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 336 pages
Availability: In Stock
30 Product(s) Sold
This Offer Expires In:
Rs.920.00 Rs.640.00
Qty: Add to Cart

"यह पुस्तक आंख वाले व्यक्ति की बात है। किसी सोच-विचार से, किसी कल्पना से, मन के किसी खेल से इसका जन्म नहीं हुआ; बल्कि जन्म ही इस तरह की वाणी का तब होता है,जब मन पूरी तरह शांत हो गया हो। और मन के शांत होने का एक ही अर्थ होता है कि मन जब होता ही नहीं। क्योंकि मन जब भी होता है, अशांत ही होता है।
 

जहां मन खो जाता है वहां आकाश के रहस्य प्रकट होने शुरू हो जाते हैं।
ब्लावट्स्की की यह पुस्तक ऐसी ही है।हवा का एक झोंका है ब्लावट्स्की।और कोई उससे बहुत महानतर शक्ति उस पर आविष्ट हो गयी है, और वह हवा का झोंका इस सुगंध को ले आया है। इस पुस्तक के एक-एक सूत्र को समझपूर्वक अगर प्रयोग किया, तो जीवन से वासना ऐसे झड़ जाती है, जैसे कोई धूल से भरा हुआ आये और स्नान कर ले तो सारी धूल झड़ जाए। या कोई थका-मांदा, किसी वृक्ष की छाया के नीचे विश्राम कर ले और सारी थकान विसर्जित हो जाए।" ओशो 
 

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:

ध्यान का अर्थ
रेचन और ध्यान

कामवासना क्या है?

विश्राम की कला

 

सामग्री तालिक

 

अनुक्रम

   #1: स्रोतापन्न बन
   #2: प्रथम दर्शन
   #3: सम्यक दर्शन
   #4: सम्यक जीवन
   #5: प्रवेश द्वार
   #6: क्षांति
   #7: घातक छाया
   #8: अस्तित्व से तादात्म्य
   #9: स्वामी बन
   #10: आगे बढ़
   #11: मन के पार
   #12: सावधान!
   #13: समय और तू
   #14: तितिक्षा
   #15: बोधिसत्व बन!
   #16: ऐसा है आर्य मार्ग
   #17: प्राणिमात्र के लिए शांति
 
  • उद्धरण : समाधि के सप्त द्वार - पहला प्रवचन - स्रोतापन्न बन

"ध्यान मृत्यु जैसा है।
मरते वक्त अकेले जाना होगा, फिर आप न कह सकेंगे कि कोई साथ चले। सब संगी-साथी जीवन के हैं, मृत्यु में कोई संगी-साथी न होगा। और ध्यान एक भांति की मृत्यु है, इसमें भी अकेले ही जाना होगा। और ऐसा भी हो सकता है कि कोई आपके साथ मरने को भी राजी हो जाए, आपके साथ ही आत्महत्या कर ले; यद्यपि यह आत्महत्या भी जीवन में ही साथ दिखाई पड़ेगी, मृत्यु में तो दोनों अलग-अलग हो जाएंगे। क्योंकि सब संगी-साथी शरीर के हैं, शरीर के छूटते ही कोई संग-साथ नहीं है।
 

लेकिन फिर भी यह हो सकता है कि दो व्यक्ति साथ-साथ मरने को राजी हो जाएं। दो प्रेमी साथ-साथ ही नियाग्रा में कूद पड़ें, यह हो सकता है। यह हुआ है। लेकिन ध्यान में तो इतना भी नहीं हो सकता कि दो व्यक्ति साथ-साथ कूद पड़ें। क्योंकि ध्यान का तो शरीर से इतना भी संबंध नहीं है। मृत्यु का तो शरीर से थोड़ा संबंध है। ध्यान तो नितांत ही आंतरिक यात्रा है। ध्यान तो शुरू ही वहां होता है, जहां शरीर समाप्त हो रहा है। जहां शरीर की सीमा आती है, वहीं से तो ध्यान की यात्रा शुरू होती है। वहां कोई संगी-साथी नहीं है।…

अकेले होने का डर ही; हमारी बाधा है,परमात्मा की तरफ जाने में। और उसकी तरफ तो वही जा सकेगा, जो पूरी तरह अकेला होने को राजी है। हम तो परमात्मा की भी बात इसीलिए करते हैं कि जब कोई भी साथ न होगा, तो कम से कम परमात्मा तो साथ होगा। हम तो उसे भी संगी-साथी की तरह खोजते हैं। इसलिए जब हम अकेले होते हैं, अंधेरे में होते हैं, जंगल में भटक गए होते हैं, तो हम परमात्मा की याद करते हैं। वह याद भी अकेले होने से बचने की कोशिश है। वहां भी हम किसी दूसरे की कल्पना करते हैं कि कोई साथ है। कोई न हो साथ तो कम से कम परमात्मा साथ है; लेकिन साथ हमें चाहिए ही। और जब तक हमें साथ चाहिए, तब तक परमात्मा से कोई साथ नहीं हो सकता। उसकी तरफ तो जाता ही वह है, जो अकेला होने को राजी है।"—ओशो

 

There are no reviews for this product.

Write a review

Your Name:


Your Review:Note: HTML is not translated!

Rating: Bad           Good

Enter the code in the box below:



पुस्तक के बारे मेंDhyan Sutra - ध्यान-सूत्रमहाबलेश्वर के प्राकृतिक वातावरण में ओशो द्वारा संचाल..
Rs.360.00
Based on 1 reviews.
Books I Have Loved -37%
About Books I Have LovedAn extraordinary book written under extraordinary circumstances: Osho, w..
Rs.950.00 Rs.600.00
Yog Naye Aayam -9%
   पुस्तक के बारे मेंYog Naye Aayam - योग : नये आयाम ..
Rs.220.00 Rs.200.00
Based on 1 reviews.