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Ritu Aaye Phal Hoye

Ritu Aaye Phal Hoye
Views: 359 Brand: Divyansh Publication
Product Code: Paperback - 335 pages
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जेन फकीरों पर ओशो द्वारा फरवरी, 1975 में अंग्रेजी में दिए गए 8 प्रवचनों (The Grass Grows By Itself) का हिंदी अनुवाद है यह पुस्तक।
अंग्रेजी से हिंदी में इस पुस्तक को अनुवाद किया है स्वामी ज्ञानभेद ने।
पुस्तक के प्रथम प्रवचन ‘जेन का महत्व क्या है?’ में ओशो समझाते हैं: ‘‘जेन है एक बहुत असाधारण विकास। बहुत थोड़े से असाधारण लोग ही ऐसी संभावना को यथार्थ में बदल पाते हैं।
क्योंकि इसमें बहुत से खतरे और उलझनें आती हैं। बहुत समय पूर्व जो एक संभावना अस्तित्व में थी, सौभाग्य से उसका आध्यात्मिक विकास हो सका--और जेन जैसी अनूठी चीज का जन्म हुआ। लेकिन कभी भी उसे समग्रता से समझा नहीं गया। मनुष्य की चेतना के पूरे इतिहास में केवल एक बाहर ही जे़न जैसी कोई चीज अस्तित्व में आई। ऐसा होना अति असाधारण है।
इसलिए पहले मैं तुम्हें यह समझाना चाहूंगा कि जेन है क्या? क्योंकि यदि तुम इसे समझे ही नहीं, तो यह प्रसंग अधिक सहायक न होंगे, तुम्हें इनकी पूरी पृष्ठभूमि जानना आवश्यक है।’’
ओशो की इस आनंदमयी दृष्टि के साथ हम आपको इन अमृत-वचनों की गंगा में डूबने का निमंत्रण देते हैं।

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