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Dharm Sadhana Ke Sutra

Dharm Sadhana Ke Sutra
Views: 16 Brand: Manoj Publication
Product Code: Paperback - 232 pages
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पुस्तक के बारे मेंDharm Sadhana Ke Sutra - धर्म साधना के सूत्र

साधना के जगत में सहज प्रवेश के अत्यंत सरल सूत्र देते हुए ओशो कहते हैं : ‘सुबह जब आखिरी तारे डूबते हों, तब हाथ जोड़ कर उन तारों के पास बैठ जाएं और उन तारों को डूबते हुए, मिस्ट्री में खोते हुए देखते रहें। और आपके भीतर भी कुछ डूबेगा, आपके भीतर भी कुछ गहरा होगा। सुबह के उगते हुए सूरज को देखते रहें। कुछ न करें, सिर्फ देखते रहें। उगने दें। उधर सूरज उगेगा, इधर भीतर भी कुछ उगेगा। खुले आकाश के नीचे लेट जाएं और घंटे दो घंटे सिर्फ आकाश को देखते रहें तो विस्तार का अनुभव होगा। कितना विराट है सब, आदमी कितना छोटा है! फूल को खिलते हुए देखें, चिटकते हुए, उसके पास बैठ जाएं, उसके रंग और उसकी सुगंध को फैलते देखें। एक पक्षी के गीत के पास कभी रुक जाएं, कभी किसी वृक्ष ‍को गले लगा कर उसके पास बैठ जाएं। और आदमी के बनाए मंदिर-मस्जिद जहां नहीं पहुंचा सकेंगे, वहां परमात्मा का बनाया हुआ रेत का कण भी पहुंचा सकता है।’

 

विषय सूची

प्रवचन 1 : धर्म परम विज्ञान है

प्रवचन 2 : ध्यान में मिटने का भय

प्रवचन 3 : परमात्मा की खोज

प्रवचन 4 : तीन सूत्र : बहना, मिटना, सर्व-स्वीकार

प्रवचन 5 : मनुष्य के अज्ञान का आधार

प्रवचन 6 : अमृत की उपलब्धि

प्रवचन 7 : प्राणों की प्यास

प्रवचन 8 : रहस्य का द्वार

प्रवचन 9 : जीवन की वीणा का संगीत

प्रवचन 10 : प्रेम ही परमात्मा है

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