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Upasana Ke Kshan

Upasana Ke Kshan
Views: 406 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 316 pages
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पुस्तक के बारे मेंUpasana Ke Kshan - उपासना के क्षण

उपासना का मतलब होता है: ‘उसके’ पास बैठना। और जितना द्वैत होगा, उतनी आसन से दूरी रहेगी। उतनी उपासना कम होगी। जितना अभेद होगा, उतने ही उसके निकट हम बैठ पाएंगे। उपवास का भी वही अर्थ होता है, उपासना का भी वही अर्थ होता है। उपवास का मतलब होता है: उसके निकट रहना। उसका मतलब भी भूखे मरना नहीं होता है। 
तो उसके निकट हम कैसे पहुंच जाएं? 
और अगर उसकी निकटता में थोड़ी भी दूरी रही, तो दूरी रही। तो उसके निकट तो हम वही होकर ही हो सकते हैं। कितनी भी निकटता रही, तो भी दूरी रही। निकटता भी दूरी का ही नाम है--कम दूरी का नाम, ज्यादा दूरी का नाम। तो ठीक निकट तो हम तभी हो सकते हैं, जब हम वही हो जाएं। 
ओशो 

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: 
 

  • निरंतर चलते विचारों से मुक्ति के उपाय 
  • क्या है क्रोध का मनोविज्ञान? 
  • जीवन कैसे जाना जाए? 
  • ‘टोटल लिविंग’ का क्या मतलब है? 
  • चिंता और विचार का फर्क 
  • समझ के साथ साहस की बड़ी जरूरत होती है
     

    विषय सूची

  • प्रवचन 1: मन का विसर्जन 
  • प्रवचन 2: विसर्जन की कला 
  • प्रवचन 3: श्रद्धा, अश्रद्धा और विश्वास 
  • प्रवचन 4: जीवन क्या है? 
  • प्रवचन 5: निर्विचार परिपूर्ण शक्ति है 
  • प्रवचन 6: मन के पार 
  • प्रवचन 7: उपासना का मतलब: पास बैठना 
  • प्रवचन 8: जीते-जी मरने की कला 
  • प्रवचन 9: प्रयासरहित प्रयास 
  • प्रवचन 10: सफलता नहीं, सुफलता 
  • प्रवचन 11: अलोभ की दृष्टि

 

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