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Sambhvnaon Ki Aahat

Sambhvnaon Ki Aahat
Views: 4096 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 180 pages
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पुस्तक के बारे में

  Sambhvnaon Ki Aahat - संभावनाओं की आहट

मनुष्य साधारणतः आदत में जीता है और आदत को तोड़ना कठिनाई मालूम पड़ती है। हमारी भी सब आदतें हैं, जो ध्यान में बाधा बनती हैं। 

ध्यान में और कोई बाधा नहीं है, सिर्फ हमारी आदतों के अतिरिक्त। 

अगर हम अपनी आदतों को समझ लें और उनसे मुक्त होने का थोड़ा सा भी प्रयास करें तो ध्यान में ऐसे गति हो जाती है, इतनी सरलता से जैसे झरने के ऊपर से कोई पत्थर हटा ले और झरना बह जाए। जैसे कोई पत्थर को टकरा दे और आग जल जाए। इतनी ही सरलता से ध्यान में प्रवेश हो जाता है। लेकिन हमारी आदतें प्रतिकूल हैं। ... 

हमारी एक आदत है सदा कुछ न कुछ करते रहने की। ध्यान में इससे खतरनाक और विपरीत कोई आदत नहीं हो सकती है। 

ध्यान है न-करना। ध्यान है नॉन-डूइंग। ध्यान है कुछ भी न करना। 

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: 

  • खाली होने की कला ही ध्यान है 
  • धर्म क्रांति है, धर्म विकास नहीं है 
  • क्या हैं धारणाओं से मुक्ति के उपाय? 
  • अहंकार सबसे बड़ा बोझ है 
  • संकल्प उन्हें उपलब्ध होता है, जो विकल्प से मुक्त हो जाते हैं

    विषय सूची

  • प्रवचन 1: विरामहीन अंतर्यात्रा 
  • प्रवचन 2: चैतन्य का द्वार 
  • प्रवचन 3: विपरीत ध्रुवों का समन्वय संगीत 
  • प्रवचन 4: अपना-अपना अंधेरा 
  • प्रवचन 5: धारणाओं की आग 
  • प्रवचन 6: अंधे मन का ज्वर 
  • प्रवचन 7: संकल्पों के बाहर
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