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Jeevan Sangeet

Jeevan Sangeet
Views: 4335 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 232 pages
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पुस्तक के बारे मेंJeevan Sangeet - जीवन संगीत

ध्यान साधना पर प्रवचन 

जो वीणा से संगीत के पैदा होने का नियम है, वही जीवन-वीणा से संगीत पैदा होने का नियम भी है। जीवन-वीणा की भी एक ऐसी अवस्था है, जब न तो उत्तेजना इस तरफ होती है, न उस तरफ। न खिंचाव इस तरफ होता है, न उस तरफ। और तार मध्य में होते हैं। तब न दुख होता है, न सुख होता है। क्योंकि सुख एक खिंचाव है, दुख एक खिंचाव है। और तार जीवन के मध्य में होते हैं--सुख और दुख दोनों के पार होते हैं। वहीं वह जाना जाता है जो आत्मा है, जो जीवन है, जो आनंद है। 

आत्मा तो निश्र्चित ही दोनों के अतीत है। और जब तक हम दोनों के अतीत आंख को नहीं ले जाते, तब तक आत्मा का हमें कोई अनुभव नहीं होगा। 
ओशो 

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: 
 

  • क्या आप दूसरों की आंखों में अपनी परछाईं देख कर जीते हैं? 
  • क्या आप सपनों में जीते हैं? 
  • हमारे सुख के सारे उपाय कहीं दुख को भुलाने के मार्ग ही तो नहीं हैं? 
  • प्रेम से ज्यादा पवित्र और क्या है? 
  • क्या आप भीतर से अमीर हैं? 
  • जीवन का अर्थ क्या है?

    विषय सूची

  • प्रवचन 1: पहला सूत्र: आत्म-स्वतंत्रता का बोध 
  • प्रवचन 2: दूसरा सूत्र: खोजें मत, ठहरें 
  • प्रवचन 3: विचार-क्रांति 
  • प्रवचन 4. स्वप्न से जागरण की और 
  • प्रवचन 5. दुख के प्रति जागरण 
  • प्रवचन 6. समस्त के प्रति प्रेम ही प्रार्थना है 
  • प्रवचन 7. विश्वास: सत्य की खोज में सबसे बड़ी बाधा 
  • प्रवचन 8. प्रार्थना का रहस्य 
  • प्रवचन 9: क्रांति एक विस्फोट है, ध्यान एक विकास है 
  • प्रवचन 10: नये का आमंत्रण

 

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