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Panth Prem Ko Atpato

Panth Prem Ko Atpato
Views: 4038 Brand: Osho Media International
Product Code: Paperback - 120 pages
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पुस्तक के बारे मेंPanth Prem Ko Atpato - पंथ प्रेम को अटपटो

होश आत्मा का दीया है। वही ध्यान है, उसी को मैं मेडिटेशन कहता हूं। होश ध्यान है। निरंतर अपने जीवन के प्रति, सारे तथ्यों के प्रति जागे हुए होना ध्यान है। वही दीया है, वही ज्योति है। उसको जगा लें और फिर देखें, पाएंगे, अंधेरा क्रमशः विलीन होता चला जा रहा है। एक दिन आप पाएंगे, अंधेरा है ही नहीं। एक दिन आप पाएंगे, आपके सारे प्राण प्रकाश से भर गए। और एक ऐसे प्रकाश से, जो अलौकिक है। एक ऐसे प्रकाश से, जो परमात्मा का है। एक ऐसे प्रकाश से, जो इस लोक का नहीं, इस समय का नहीं, इस काल का नहीं, जो कहीं दूरगामी, किसी बहुत केंद्रीय तत्व से आता है। और उसके ही आलोक में जीवन नृत्य से भर जाता है, संगीत से भर जाता है। तभी शांति है, तभी सत्य है।
ओशो 

पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु:

  • ब्रह्मचर्य परम भोग है 
  • मनुष्य विक्षिप्त क्यों है? 
  • जागना ही एकमात्र तपश्चर्या है 
  • ज्ञान भीख नहीं है 
  • अहंकार से मुक्ति का उपाय क्या है?

    विषय सूची

  • प्रवचन 1: ब्रह्मचर्य और समाधि 
  • प्रवचन 2: मनुष्य विक्षिप्त क्यों है? 
  • प्रवचन 3: होश से क्रांति 
  • प्रवचन 4: स्वयं का साक्षात 
  • प्रवचन 5: अहंकार का भ्रम
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