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Shiv Sutra

Shiv Sutra
Views: 12318 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 244 pages
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पुस्तक के बारे मेंShiv Sutra - शिव-सूत्र

इस पुस्तक से:
* अपनी तरफ देखो—न तो पीछे, न आगे। कोई तुम्हारा नहीं है। कोई बेटा तुम्हें नहीं भर सकेगा। कोई संबंध तुम्हारी आत्मा नहीं बन सकता। तुम्हारे अतिरिक्त तुम्हारा कोई मित्र नहीं है।
* जैसे कि आग को तुम उकसाते हो—राख जम जाती है, तुम उकसा देते हो; राख झड़ जाती है, अंगारे झलकने लगते हैं। ऐसी तुम्हें कोई प्रक्रिया चाहिए, जिससे राख तुम्हारी झड़े और अंगारा चमके; क्योंकि उसी चमक में तुम पहचानोगे कि तुम चैतन्य हो। और जितने तुम चैतन्य हो, उतने ही तुम आत्मवान हो।
* तुम्हारी महत यात्रा में, जीवन की खोज में, सत्य के मंदिर तक पहुंचने में—ध्यान बीज है। ध्यान क्या है?—जिसका इतना मूल्य है; जो कि खिल जाएगा तो तुम परमात्मा हो जाओगे; जो सड़ जाएगा तो तुम नारकीय जीवन व्यतीत करोगे। ध्यान क्या है? ध्यान है निर्विचार चैतन्य की अवस्था, जहां होश तो पूरा हो और विचार बिलकुल न हों।

विषय सूची

प्रवचन 1 : जीवन-सत्य की खोज की दिशा
प्रवचन 2 : जीवन-जागृति के साधना-सूत्र
प्रवचन 3 : योग के सूत्र : विस्मय, वितर्क, विवेक
प्रवचन 4 : चित्त के अतिक्रमण के उपाय
प्रवचन 5 : संसार के सम्मोहन और सत्य का आलोक
प्रवचन 6 : दृष्टि ही सृष्टि ‍है
प्रवचन 7 : ध्यान अर्थात चिदात्म सरोवर में स्नान
प्रवचन 8 : जिन जागा तिन मानिक पाइया
प्रवचन 9 : साधो, सहज समाधि भली !
प्रवचन 10 : साक्षित्व ही शिवत्व है


 
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