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Jeevan Hi Hai Prabhu

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Views: 599 Brand: Osho Media International
Product Code: Paperback -132 pages
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पुस्तक के बारे मेंJeevan Hi Hai Prabhu - जीवन ‍ही है प्रभु

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है: सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है। जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है। उस दिन जिंदगी और हो जाती है। उस दिन चोर होना असंभव है। सम्राट कहीं चोर होते हैं! उस दिन क्रोध करना असंभव है। उस दिन दुखी होना असंभव है। उस दिन एक नया जगत शुरू होता है। उस जगत, उस जीवन की खोज ही धर्म है। इन चर्चाओं में इस जीवन, इस प्रभु को खोजने के लिए क्या हम करें, उस संबंध में कुछ बातें मैंने कही हैं। मेरी बातों से वह किरण न आएगी, मेरी बातों से वह रथ भी न आएगा, मेरी बातों से आप उस जगह न पहुंच जाएंगे। लेकिन हां, मेरी बातें आपको प्यासा कर सकती हैं। मेरी बातें आपके मन में घाव छोड़ जा सकती हैं। मेरी बातों से आपके मन की नींद थोड़ी बहुत चौंक सकती है। हो सकता है, शायद आप चौंक जाएं और उस यात्रा पर निकल जाएं जो ध्यान की यात्रा है। तो निश्र्चित है, आश्र्वासन है कि जो कभी भी ध्यान की यात्रा पर गया है, वह धर्म के मंदिर पर पहुंच जाता है। ध्यान का पथ है, उपलब्ध धर्म का मंदिर हो जाता है। और उस मंदिर के भीतर जो प्रभु विराजमान है, वह कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, समस्त जीवन का ही प्रभु है।
ओशो

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:

* परमात्मा को कहां खोजें?
* क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं?
*जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना
* क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी?

समीक्षा

समीक्षा इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:  परमात्मा को कहां खोजें?  क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं?  जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना  क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी?

विषय सूची

प्रवचन 1 : प्रभु की खोज

प्रवचन 2 : बहने दो जीवन को

प्रवचन 3 : प्रभु की पुकार

प्रवचन 4 : जिंदगी बहाव है महान से महान की तरफ

प्रवचन 5 : प्रभु का द्वार

प्रवचन 6 : ध्यान अविरोध है

प्रवचन 7 : जीवन ही है प्रभु
 


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