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Geeta Darshan Vol. 01

-10% Geeta Darshan Vol. 01
Views: 20609 Brand: Osho Media International
Product Code: Hardbound - 508 pages
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पुस्तक के बारे मेंGeeta Darshan-Vol.1 - गीता-दर्शन भाग एक

शास्त्र की ऊंची से ऊंची ऊंचाई मनस है। शब्द की ऊंची से ऊंची संभावना मनस है। अभिव्यक्ति की आखिरी सीमा मनस है। जहां तक मन है, वहां तक प्रकट हो सकता है। जहां मन नहीं है, वहां सब अप्रकट रह जाता है।...

गीता ऐसा मनोविज्ञान है, जो मन के पार इशारा करता है। लेकिन है मनोविज्ञान ही। अध्यात्म-शास्त्र उसे मैं नहीं कहूंगा। और इसलिए नहीं कि कोई और अध्यात्म-शास्त्र है। कहीं कोई शास्त्र अध्यात्म का नहीं है। अध्यात्म की घोषणा ही यही है कि शास्त्र में संभव नहीं है मेरा होना, शब्द में मैं नहीं समाऊंगा, कोई बुद्धि की सीमा-रेखा में नहीं मुझे बांधा जा सकता। जो सब सीमाओं का अतिक्रमण कर जाता है, और सब शब्दों को व्यर्थ कर जाता है, और सब अभिव्यक्तियों को शून्य कर जाता है--वैसी जो अनुभूति है, उसका नाम अध्यात्म है।
ओशो

इस पुस्तक में गीता के प्रथम तीन अध्यायों--विषादयोग, सांख्ययोग एवं कर्मयोग--तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।

कुछ विषय बिंदु:

*विषाद और संताप से आत्म-क्रांति की ओर
*आत्म-विद्या के गूढ़ आयामों का उदघाटन
*निष्काम कर्म और अखंड मन की कीमिया
*मन के अधोगमन और ऊर्ध्वगमन की सीढ़ियां
*परधर्म, स्वधर्म और धर्म

विषय सूची

प्रवचन 1 : विचारवान अर्जुन और युद्ध का धर्मसंकट
प्रवचन 2 : अर्जुन के विषाद का मनोविश्लेषण
प्रवचन 3 : विषाद और संताप से आत्म-क्रांति की ओर
प्रवचन 4 : दलीलों के पीछे छिपा ममत्व और हिंसा
प्रवचन 5 : अर्जुन का पलायन—अहंकार की ही दूसरी अति
प्रवचन 6 : मृत्यु के पीछे अजन्मा, अमृत और सनातन का दर्शन
प्रवचन 7 : भागना नहीं—जागना है
प्रवचन 8 : मरणधर्मा शरीर और अमृत, अरूप आत्मा
प्रवचन 9 : आत्म-विद्या के गूढ़ आयामों का उदघाटन
प्रवचन 10 : जीवन की परम धन्यता—स्वधर्म की पूर्णता में
प्रवचन 11 : अर्जुन का जीवन शिखर—युद्ध के ही माध्यम से
प्रवचन 12 : निष्काम कर्म और अखंड मन की कीमिया
प्रवचन 13 : काम, द्वंद्व और शास्त्र से—निष्काम, निर्द्वंद्व और स्वानुभव की ओर
प्रवचन 14 : फलाकांक्षारहित कर्म, जीवंत समता और परमपद
प्रवचन 15 : मोह-मुक्ति, आत्म-तृ‍प्ति और प्रज्ञा की थिरता
प्रवचन 16 : विषय-त्याग नहीं—रस-विसर्जन मार्ग है
प्रवचन 17 : मन के अधोगमन और ऊर्ध्वगमन की सीढियां
प्रवचन 18 : विषाद की खाई से ब्राह्मी-स्थिति के शिखर तक
प्रवचन 19 : स्वधर्म की खोज
प्रवचन 20 : कर्ता का भ्रम
प्रवचन 21 : परमात्म समर्पित कर्म
प्रवचन 22 : समर्पित जीवन का विज्ञान
प्रवचन 23 : पूर्व की जीवन-कला : आश्रम प्रणाली
प्रवचन 24 : वर्ण व्यवस्था की वैज्ञानिक पुनर्स्थापना
प्रवचन 25 : अहंकार का भ्रम
प्रवचन 26 : श्रद्धा है द्वार
प्रवचन 27 : परधर्म, स्वधर्म और धर्म
प्रवचन 28 : वासना की धूल, चेतना का दर्पण
 


   
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